जाने भारत की गहरी नदियों की विशेषताएं

जाने भारत की गहरी नदियों की विशेषताएं

भारत को नदियों का देश कहा जाता है. प्राचीन काल से ही भारत के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में नदियों का काफी विशेष महत्व रहा है.

नदियों को भारत में जीवन का आधार माना जाता है.भारत में ऐसी कई नदिया बहती है जो पेयजल और सिंचाई के लिए सहारा बनी हुई है.

ब्रह्मपुत्र नदी

ब्रह्मपुत्र नदी गहरी और लम्बी नदियों में से एक है.यह नदी तिब्बत के दक्षिण में मानसरोवर कैलाश पर्वत से निकलती है. इस नदी की पूरी लम्बाई 2900 किलोमीटर है. इसकी सहायक नदिया सुवनश्री, तिस्ता, तोर्सा, लोहित, बराक आदि हैं.इस नदी की गहराई 380 फ़ीट गहरी है.

ये नदी एशिया महाद्वीप में बहने वाली सबसे लम्बी नदी है. इस नदी की लम्बाई का समापन बंगाल की खाड़ी में होता है. नदी के किनारे काफी शहर बसे हुए है जैसे की – डिब्रूगढ़, तेजपुर एंव गुवाहाटी आदि.

ब्रह्मपुत्र के अन्य नाम

ब्रह्मपुत्र नदी को अलग अलग नामो से भी पुकारा जाता है. जैसे की

  • बांग्ला भाषा में इसे जमुना के नाम से पुकारा जाता है.
  • अरुणाचल में डिहं के नाम से बुलाया जाता है.
  • असम में इसे ब्रह्मपुत्र के नाम से ही बुलाया जाता है.

भागीरथी नदी

भागीरथी भारत की एक हिमालय नदी है.भागीरथी नदी उत्तरांचल से होकर बहती है.यह एक हिमालय नदी है जिसे हिन्दुओ में पवित्र माना जाता है. इस नदी का नाम प्राचीन राजा भागीरथी के नाम से रखा गया. यह नदी समुद्र स्तर से 3892 मीटर की ऊंचाई पर बहती है इस नदी की सहायक नदी भी है.

आपको बता दे भागीरथी नदी के पास ही टिहरी बांध का निर्माण किया गया है. टिहरी बाँध ऊंचाई 261 मीटर है,जो विश्व का पांचवा सबसे ऊँचा बाँध है.

अलकनंदा नदी

अलकनंदा गंगा की सहयोग नदी है.गंगोत्री में गंगा को भागीरथी के नाम से जाना जाता है, केदारनाथ में मंदाकनी और बदरीनाथ में अलकनंदा के नाम से जाना जाता है. इसकी लम्बाई 190 किलोमीटर है ये 180 मील है.

इस नदी की ओर से बहने वाली काफी सहायक नदिया – धौलीगंगा , नंदाकिनी तथा पिंडार हैं.

भागीरथी देवप्रयाग में अलकनंदा से जाकर मिलती है.उसके बाद ये दोनों नदिया गंगा नदी से जाकर मिलती है और ये हरिद्वार के पास पहाड़ी को छोड़कर मैदानी भागो में बहती है.

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