कोर्णाक सूर्य मंदिर भारत के ओडिशा के तट पर लगभग 35 किलोमीटर दूर उत्तर पूर्व कोर्णाक में स्थित है. यह मंदिर सूर्य देव को समर्पित किया जाता है. यह एक विशाल मंदिर है जो भारतीय पर्यटन स्थलों में से एक है.

इस मंदिर को देखने के लिए बाहर से काफी संख्या में सैलानीयों का आगमन लगा रहता है.कोर्णाक दो शब्दों कोण अथवा अर्क से मिलकर बना है जहा कोण का अर्थ कोना तथा अर्क का सूर्य होता है. दोनों को मिलाने से सूर्य का कोना है अर्थात कोर्णाक है.

इस मंदिर को ब्लैक पैगोडा के नाम से भी जाना जाता है क्योकि मंदिर का ऊँचा टावर काला दिखाई देता है. कोर्णाक के सूर्य मंदिर को यूनेस्को ने 1984 में विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी है.

किसने बनवाया कोर्णाक सूर्य मंदिर ?

ब्राह्मण मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में पूर्वी गंगा राजवंश के राजा नरसिम्हादेव प्रथम (1238 -1250 CE ) द्वारा किया गया और यह सूर्य देव को समर्पित किया जाता है. पुरानी कथाओ के अनुसार भगवान् कृष्ण के पुत्र साम्ब को उनके श्राप से कोढ़ रोग हो गया था . सूर्यदेव जो हर रोग के नाशक थे, उन्होंने इस रोग का भी निवारण कर दिया था. तब साम्ब देव ने सूर्य को सम्मानित करने के लिए कोर्णाक सूर्य मंदिर का निर्माण किया.

सूर्य मंदिर कहा स्थित है ?

कोर्णाक सूर्य मंदिर भारत के ओडिशा के तट पर पुरी से लगभग 35 किलोमीटर उत्तरपूर्व कोर्णाक में 13वीं शताब्दी का मशहूर सूर्य मंदिर है.

कोर्णाक सूर्य मंदिर के कुछ रोचक तथ्य

मंदिर के शीर्ष पर एक भारी चुम्बक रखा गया था और मंदिर के हर दो पत्थर लोहे की प्लेटो से सजाया गया है. कहा जाता है की मैगनेट के कारण मूर्ति हवा में लहराती हुई दिखती है.

सूर्य देव को ऊर्जा और जीवन का प्रतीक माना जाता है. कोर्णाक सूर्य मंदिर रोगो का उपचार तथा इच्छाओं को पूरा करने के लिए काफी माना जाता है.

ये मंदिर ओडिशा में स्थित पांच धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है .सूर्य मंदिर परिसर में नाटा मंदिर यानि नृत्य हाल भी देखने लायक है .

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